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Thursday, January 18, 2018

प्रेरणा

प्रेरणा  किसी भी धर्म का मूल और परिणाम होती है इसके बिना हम किसी कार्य की शुरुआत ही नहीं कर सकते हैं यह एक ऐसी ऊर्जा है जो कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है काव्य के पीछे प्रबल प्रेरणा से ही असंभव जैसे कठिन कार्य समय के साथ पूरे कर लिए जाते हैं कोई भी चीज यूं ही अनुमन्य ढंग से पाई और पूरी नहीं की जा सकती है किसी कार्य को शुरू से अंत तक एक लाइक के साथ करना एक चुनौती है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य से प्रेरित हुए बिना असंभव है जहां भी हमारी प्रेरणा कमजोर होती है हमारे कार्य का अंजाम लड़खड़ा जाता है असफलता के कारणों का यदि सूचना विश्लेषण किया जाए तो पता चलेगा कि इन में अधिकतर का कारण प्रेरणा का अभाव ही है
सफल व्यक्तियों या महापुरुषों की जीवन गाथा को देखें तो पता चलेगा कि वह अपने लक्ष्य के प्रति प्रेरित थे प्रेरणा कैसे मिले कौन हमें प्रेरित करें और इसे कैसे लगातार बनाए रखें समाज में जिसकी प्रतिष्ठा होती है जिसे अच्छा माना जाता है हम उसी ओर आकर्षित होते हैं समाज के मूल्य और मानदंड हमें उसको जाने की अनायास ही प्रेरणा देते हैं हम उसे पाने के लिए बरबस चल पड़ते हैं मूल्यों की उत्कृष्टता और निकृष्टता समाज के ऊपर निर्भर करती है परंतु समाज में जो भी मूल्य प्रभावी होंगे वही हमें प्रेरित एवं प्रभावित करते हैं समाज हमारी प्रेरणा का प्रमुख केंद्र है स्वतंत्रता आंदोलन में वीर बलिदानियों की लंबी सूची है यह शहीद भारत माता के चरणों में अपने जीवन को खुशी खुशी इसी कारण उत्सर्ग कर सके क्योंकि राष्ट्र के प्रति अपार प्रेम ही उन्हें इस ओर प्रेरित करता रहा आज अधिकांश लोग केवल किसी भी प्रकार से रातों-रात धनवान हो जाने की कार्य योजना को क्रियान्वित करने में जुटे हैं यहां पर जो चीज उन्हें प्रेरित कर रही है वह धन लेकिन याद रखें धन से आप सुख सुविधाएं और वस्तुएं खरीद सकते हैं लेकिन शांति नहीं खरीद सकते